2026 में डेयरी प्रोसेसिंग उद्योग महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक और भारतीय बाजारों में नई तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और उपभोक्ता मांगों में परिवर्तन हो रहा है। यह ब्लॉग डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट मैनेजर्स, क्वालिटी कंट्रोल टीमों और इंजीनियरों के लिए सत्यापित स्रोतों के साथ 5 प्रमुख ट्रेंड्स प्रस्तुत करता है।
ट्रेंड 1: प्रोसेसिंग में ऑटोमेशन और AI का तेजी से अपनाना
मुख्य तथ्य
- 2026 तक अमेरिका में 60% से अधिक डेयरी फार्म ऑटोमेटेड मिल्किंग सिस्टम अपनाएंगे।
- डेयरी ऑटोमेशन मार्केट 2023 में USD 1.99 बिलियन से बढ़कर 2030 तक USD 3.16 बिलियन होने का अनुमान (6.8% CAGR)।
- सर्विस रोबोटिक्स मार्केट 2026 तक USD 110.4 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद (21.2% CAGR)।
तकनीकी अनुप्रयोग
- इनलाइन सेंसर और रियल-टाइम मॉनिटरिंग: फैट कंटेंट, प्रोटीन लेवल, pH और माइक्रोबियल लोड की तुरंत जांच।
- AI-आधारित डिफेक्ट डिटेक्शन: प्रोडक्शन के हर चरण में गुणवत्ता निगरानी।
- प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस: ब्रेकडाउन से पहले मशीन की समस्याओं का पता लगाना।
क्वालिटी पैरामीटर प्रभाव
ऑटोमेटेड सिस्टम मानवीय त्रुटि को कम करते हैं और निम्नलिखित पैरामीटर्स को स्वचालित रूप से समायोजित करते हैं:
- मिल्क फैट कंटेंट: ±0.1% accuracy
- तापमान नियंत्रण: ±0.5°C precision
- pH लेवल: ±0.05 units
ट्रेंड 2: भारत में आपूर्ति श्रृंखला में तनाव और मूल्य वर्धित उत्पादों की ओर बदलाव
बाजार की स्थिति
- भारतीय डेयरी मार्केट 2025 में INR 21,318.5 बिलियन से 2034 तक INR 57,859.1 बिलियन (11.73% CAGR)।
- 2026 की शुरुआत में मिल्क सप्लाई टाइट होने की उम्मीद।
- अप्रैल 2026 (रमजान पीरियड) के आसपास procurement cost correction अपेक्षित।
आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियां
- 2025 में अनियमित बारिश: उत्पादन पैटर्न में व्यवधान।
- भू-राजनीतिक तनाव: पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर जैसे प्रमुख मिल्क बेल्ट प्रभावित।
- त्योहारी मांग: इन्वेंटरी में कमी।
वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का उदय
उपभोक्ता मांग में संरचनात्मक परिवर्तन:
- दही, पनीर, घी और आइसक्रीम: पारंपरिक तरल दूध की तुलना में बेहतर मार्जिन।
- आइसक्रीम खपत: अब केवल मौसमी नहीं, पूरे वर्ष।
- क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स: वितरण चैनलों में तेजी से वृद्धि।
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ट्रेंड 3: फंक्शनल और फोर्टिफाइड डेयरी उत्पादों की मांग
बाजार का विकास
- फंक्शनल डेयरी सेक्टर 2025 तक 8.5% CAGR से बढ़ने की उम्मीद।
- 2025 में केफिर और साउर मिल्क प्रोडक्ट्स में 6% वैश्विक वृद्धि।
- प्रोटीन क्लेम: नॉर्थ अमेरिका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया पैसिफिक में शीर्ष दावा।
प्रमुख उत्पाद श्रेणियां
- प्रोबायोटिक योगर्ट: पाचन स्वास्थ्य के लिए।
- प्रोटीन-फोर्टिफाइड ड्रिंक्स: फिटनेस उत्साही के लिए।
- A2 मिल्क: पाचन के अनुकूल गुणों के कारण तेजी से बढ़ता सेगमेंट।
- लैक्टोज-फ्री प्रोडक्ट्स: भारत में लैक्टोज इनटॉलरेंस आम होने के कारण।
- हेल्दी चीज: मेम्ब्रेन फिल्ट्रेशन द्वारा कम फैट या अधिक प्रोटीन।
गुणवत्ता मानक
फंक्शनल प्रोडक्ट्स के लिए क्रिटिकल पैरामीटर:
- प्रोबायोटिक विएबिलिटी: न्यूनतम 10^6 CFU/g शेल्फ लाइफ के अंत तक
- प्रोटीन कंटेंट: लेबल दावे से ±5% के भीतर
- विटामिन स्टेबिलिटी: स्टोरेज के दौरान 90% से अधिक रिटेंशन
ट्रेंड 4: सस्टेनेबिलिटी और कार्बन-न्यूट्रल प्रैक्टिस
उद्योग प्रतिबद्धता
- इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (IDF): 2050 तक नेट-जीरो एमिशन का लक्ष्य।
- कई प्रोड्यूसर पहले से ही महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं।
- उपभोक्ता इको-फ्रेंडली उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
तकनीकी समाधान
- प्रिसिजन फर्मेंटेशन: माइक्रोऑर्गेनिज्म का उपयोग करके कैसिन और व्हे जैसे मुख्य मिल्क प्रोटीन का उत्पादन।
- लोकलाइज्ड सप्लाई चेन: ट्रांसपोर्टेशन से एमिशन में कटौती।
- एनर्जी-एफिशिएंट प्रोसेसिंग इक्विपमेंट: एनर्जी खपत और वेस्ट जनरेशन में कमी।
कंप्लायंस और स्टैंडर्ड्स
- कार्बन फुटप्रिंट ट्रैकिंग: डेयरी ERP सॉफ्टवेयर के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
- रिसोर्स कंजम्पशन मॉनिटरिंग: पानी और ऊर्जा उपयोग की ट्रैकिंग।
- वेस्ट रिडक्शन मेट्रिक्स: प्रोडक्शन अपशिष्ट में मापने योग्य कमी।
ट्रेंड 5: प्लांट-बेस्ड और हाइब्रिड डेयरी प्रोडक्ट्स
बाजार परिदृश्य
- 2020-2025 के बीच प्लांट-बेस्ड डेयरी ने वैश्विक स्तर पर 2.0% CAGR दर्ज किया।
- परिपक्व बाजारों में प्राइवेट लेबल्स की मार्केट शेयर 20% तक बढ़ी।
- ग्लोबल प्लांट-बेस्ड मिल्क मार्केट 2032 तक USD 51.87 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान।
तकनीकी चुनौतियां
- मेल्टेबिलिटी: वीगन चीज़ में पारंपरिक डेयरी जैसी मेल्टिंग प्रॉपर्टी हासिल करना।
- पार्टिकल एग्रीगेशन: प्लांट-बेस्ड बेवरेजेज में टेक्सचर और फ्लेवर में बदलाव को रोकना।
- न्यूट्रिशनल प्रोफाइल: पारंपरिक डेयरी के टेस्ट और न्यूट्रिशन की नकल करना।
प्रोसेसिंग समाधान
- स्टार्च मॉड्यूलेशन: मेल्टिंग विशेषताओं को बेहतर बनाने के लिए।
- एंजाइमेटिक प्रोसेसिंग: स्थिरता और न्यूट्रिशनल लाभों में सुधार के लिए।
- डुअल ग्राइंडिंग प्रोसेस: प्लांट-बेस्ड मिल्क में स्थिरता और टेक्सचर के लिए।
इक्विपमेंट और प्रोसेस पर असर
आवश्यक प्रौद्योगिकियां
- इनलाइन सेंसर सिस्टम: IO-Link के साथ रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
- प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स (PLCs): पाश्चुरीकरण, होमोजेनाइजेशन में पैरामीटर नियंत्रण।
- मेम्ब्रेन फिल्ट्रेशन टेक्नोलॉजी: फैट में कमी और प्रोटीन बूस्टिंग के लिए।
- ऑटोमेटेड क्लीनिंग सिस्टम (CIP): हाई हाइजीन स्टैंडर्ड्स बनाए रखने के लिए।
निवेश विचार
- छोटे संयंत्र: मॉड्यूलर गैन्ट्री सिस्टम जो पुरानी इमारतों में कम छत की आवश्यकताओं के साथ इंस्टॉल किए जा सकते हैं।
- बड़े संयंत्र: AS/RS (ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम) पूर्ण एकीकरण के साथ।
- ROI अपेक्षा: 2-4 वर्षों में श्रम लागत में कमी और उत्पादकता बढ़ने से।
कंप्लायंस और स्टैंडर्ड्स
वैश्विक मानक
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- FDA Grade “A” Milk Proficiency Testing: अमेरिकी मानक (निलंबित, समीक्षा के तहत)।
- FMMO (Federal Milk Marketing Order) सुधार: 2025 में प्रभावी।
- IDF (International Dairy Federation) सस्टेनेबिलिटी गाइडलाइन्स।
भारतीय नियामक
- FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) मानक।
- बीआईएस (Bureau of Indian Standards) डेयरी उत्पाद विनिर्देश।
- राज्य दुग्ध संघ नियम (प्रत्येक राज्य के अनुसार)।
प्रमुख टेकअवे और सिफारिशें
प्लांट मैनेजर्स के लिए
- ऑटोमेशन में निवेश की योजना बनाएं, ROI 2-4 वर्षों में।
- वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट लाइन्स का विस्तार करें (दही, पनीर, घी)।
- क्विक-कॉमर्स पार्टनरशिप्स विकसित करें।
QC टीमों के लिए
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को एकीकृत करें।
- फंक्शनल प्रोडक्ट्स के लिए परीक्षण प्रोटोकॉल अपडेट करें।
- ट्रेसेबिलिटी और डेटा लॉगिंग में सुधार करें।
इंजीनियरों के लिए
- IoT और IIoT तकनीकों की समझ बढ़ाएं।
- प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस एल्गोरिदम लागू करें।
- एनर्जी एफिशिएंसी मेट्रिक्स को ट्रैक करें।
अस्वीकरण – यह लेख शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और सत्यापित स्रोतों पर आधारित है। बाजार की स्थिति बदल सकती है।

